नैतिक कहानियाँ

नैतिक

हीरे की अंगूठी

एक ३४-३५ साल के एक सज्जन बड़े ही सीधे साधे,लेकिन अपने सिद्धांत के पक्के थे, नौकरी की तलाश में शहर के बीच से गुज़रे जा रह...

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ट्यूशन

मेरे पिता जी का ट्रांसफर जलालाबाद ( थानाभवन) से बदायूं हो गया,बदायूं के पास एक छोटा सा गाँव था तातागंज,वहाँ मैं कुछ दिन ...

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ईमानदार लकड़हारा

एक गरीब लकड़हारा जंगल में लकड़ी काट रहा था। अचानक उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। वह रोने लगा। तभी नदी से एक देवदूत प्रकट...

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